भारत के इतिहास में आपातकाल एक ऐसा शब्द है जो देश के लोकतंत्र संविधान और आम नागरिकों के अधिकारों की कहानी बयां करता है जब भी देश के सामने कोई बहुत बड़ा संकट आता है तो स्थिति को संभालने के लिए सरकार को कुछ विशेष अधिकार दिए जाते हैं साधारण शब्दों में कहें तो आपातकाल ऐसी व्यवस्था है जिसमें सामान्य समय के नियम और अधिकार कुछ समय के लिए बदल दिए जाते हैं ताकि देश को किसी बड़े खतरे से बचाया जा सके।
आइए इसे हम बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं कि आपातकाल क्या होता है यह क्यों लगाया जाता है और भारत में इसका क्या इतिहास रहा है।
आपातकाल का सीधा साधा मतलब क्या है?
मान लीजिए आपके घर में सब कुछ सामान्य चल रहा है लेकिन अचानक कोई बड़ी मुसीबत आ जाए जैसे कहीं आग लग जाए या कोई बड़ा संकट खड़ा हो जाए। ऐसे समय में घर के बड़े सदस्य तुरंत कुछ कड़े फैसले लेते हैं, जिन्हें सबको मारना पड़ता है उसे समय सामान्य बातचीत या रोजमर्रा के नियम थोड़ी देर के लिए रुक जाते हैं।ठीक इसी तरह पूरे देश के स्तर पर जब युद्ध, बाहरी आक्रमण, देश के भीतर सशस्त्र विद्रोह या कोई गंभीर आर्थिक संकट आ जाता है तो देश के राष्ट्रपति संविधान के तहत आपातकाल की घोषणा करते हैं आपातकाल के दौरान केंद्र सरकार के पास असीमित शक्तियां आ जाती हैं और राज्य सरकारों के अधिकारों सीमित हो जाते हैं।
भारत में आपातकाल के प्रकार
भारतीय संविधान के भाग 18 में अनुच्छेद 352 से लेकर 307 तक आपातकाल से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं मुख्य रूप से आपातकाल तीन प्रकार के होते हैं:राष्ट्रीय आपातकाल अनुच्छेद 352
- कब लगता है - जब देश पर किसी दूसरे देश का हमला हो जाए, युद्ध छिड़ जाए या देश के अंदर ही सशस्त्र विद्रोह हो जाए यानी कि एक शब्दों में कहें कि किसी भी प्रकार के हमले से बचने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जाता है।
- असर - इस दौरान पूरे देश या उसके किसी हिस्से का शासन पूरी तरह से केंद्र सरकार के हाथ में आ जाता है नागरिकों के कुछ मौलिक अधिकार निलंबित किया जा सकते हैं अर्थात अपने शब्दों में कहें तो नागरिकों के पास जो कुछ अधिकार होते हैं वह निलंबित हो जाते हैं यानी कि वह स्वतंत्र पूर्वक अपना कार्य नहीं कर सकते जब तक की स्थितियां सही ना हो जाए।
राष्ट्रपति शासन या राज्य आपातकाल अनुच्छेद 356
- कब लगता है - जब किसी राज्य की सरकार संविधान के नियमों के अनुसार काम करने में असमर्थ हो जाती है या राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ जाती है। यानी अगर एक बात में कहे तो इसका सीधा अर्थ यह है कि कोई भी राज्य अपनी सरकार चलाने में असमर्थ हो जाता है तो वहां पर राष्ट्रपति शासन लग जाता है जिससे उसे राज्य पर सीधे राष्ट्रपति का कंट्रोल हो जाता है।
- असर - उस राज्य की चुनी हुई सरकार को बर्खास्त या निलंबित कर दिया जाता है और वहां का शासन राष्ट्रपति या राज्यपाल के माध्यम से चलने लगता है।
आर्थिक आपातकाल अनुच्छेद 360
- कब लगता है - जब देश की अर्थव्यवस्था बहुत ज्यादा खतरे में हो या भारत की वित्तीय स्थिरता पर गंभीर संकट आ जाए।
- असर - इस स्थिति में सरकारी कर्मचारी जाजो आदि के वेतन में कटौती की जा सकती है और देश के बजट को केंद्र अपने नियंत्रण में ले लेता है। (आपकी जानकारी के हिसाब से बता दे कि आज तक अपने देश भारत में एक भी बार आर्थिक आपातकाल नहीं लगा है।)
आपातकाल लागू होने पर क्या-क्या बदल जाता है।
जब देश में राष्ट्रीय आपातकाल लागू होता है तो आम जनता और सरकार के कामकाज में कहीं बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं:- केंद्र सरकार का दबदबा - भारत का ढांचा संघात्मक से बदलकर एकात्मक हो जाता है यानी राज्यों के पास अपने फैसले लेने की शक्ति कम हो जाती है और दिल्ली से केंद्र सरकार पूरे देश को नियंत्रित करती है।
- मौलिक अधिकारों पर रोक- नागरिकों को मिलने वाले कुछ अधिकार जैसे सभा करना, भाषण देना, स्वतंत्रता पूर्वक घूमने कुछ समय के लिए रोके जा सकते हैं।
- संसद का कार्यकाल बढ़ाना - अगर आपातकाल के दौरान चुनाव करना संभव न हो तो लोकसभा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
- प्रेस पर सेंसरशिप - कई बार मीडिया और समाचार पत्रों पर रोक लगा दी जाती है कि वे सरकार के अनुमति के बिना खबरें नहीं छाप सकते।
भारत में 1975 का ऐतिहासिक आपातकाल
जब भी भारत में आपातकाल की बात होती है तो लोगों के मन में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 का दौर याद आता है। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे चर्चित और विवादित समय माना जाता है।1975 के आपातकाल की मुख्य बातें
- किसने लगाया - उस समय के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आंतरिक गड़बड़ी का हवाला देकर इसे लागू किया था।
- वजह क्या थी - देश में विपक्षी दलों का बड़ा आंदोलन चल रहा था, महंगाई और और बेरोजगारी को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया था।
क्या-क्या हुआ -
- रातों-रात प्रमुख विपक्षी नेताओं जैसे अटल बिहारी वाजपेई, लाल कृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, जयप्रकाश नारायण को जेल में डाल दिया गया।
- अखबारों के दफ्तरों की बिजली काट दी गई और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई।
- नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए।
- अनिवार्य नसबंदी जैसे बड़े कार्यक्रम चलाए गए।
- समाप्ति - लगभग 21 महीने के बाद मार्च 1977 में आपातकाल हटाया गया और देश में आम चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस पार्टी की हार हुई और पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार जनता पार्टी सत्ता में आई।
आपातकाल का महत्व और इसका दूसरा पहलू -
आपातकाल को लेकर हमेशा दो तरह के विचार रहे हैं:सकारात्मक पहलू (सुरक्षा के दृष्टिकोण से) -
किसी भी देश के लिए उसकी अखंडता और सुरक्षा सबसे ऊपर होती है यानी कि देश सुरक्षित रहे और देश में किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी न रहे अगर देश पर कोई विदेशी हमला कर दे या देर पर करने की कगार पर हो तो त्वरित फैसले लेने के लिए खड़े नियमों का होना जरूरी है।नकारात्मक पहलू (लोकतंत्र के लिए खतरा) -
यदि कोई सत्ताधारी सरकार अपने राजनीतिक फायदे या कुर्सी बचाने के लिए इसका उपयोग करती है तो यह लोकतंत्र की आत्मा को नुकसान पहुंचता है जनता की आवाज को दबाना और प्रेस किया जाती चिन्ना किसी भी स्वतंत्र देश के लिए सही नहीं है।वैसे एक तरह से देखे तो इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए ही देश में आपातकाल लगाया था क्योंकि आपातकाल लगने से देश के अंदर चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से बाधित हो जाती है।
कानूनी जानकारी और आपके मौलिक अधिकार
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