नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका आज के इस नए लेख में।
अगर आप हिंदी विषय के छात्र हैं तो अपने फणीश्वर नाथ रेणु जी की प्रसिद्ध कहानी पंचलाइट का नाम जरुर सुना होगा। अक्सर बोर्ड परीक्षाओं और स्कूल कॉलेज के टेस्ट में पंचलाइट कहानी का सारांश या उद्देश्य लिखने को आता है, कई बार किताबी भाषा इतनी कठिन होती है की विद्यार्थी इस सरल सी कहानी को नहीं समझ पाते और ज्यादा अच्छे से नहीं लिख पाते।
इसलिए आज के इस लेख में हम पंचलाइट कहानी को बिल्कुल अपनी आम बोलचाल की भाषा में, एक सुंदर और दिलचस्प कहानी की तरह समझेंगे। इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद आपको यह कहानी हमेशा के लिए याद हो जाएगी और आप इसे अपनी परीक्षा में बिना रटे अपने शब्दों में लिख पाएंगे। तो चलिए, कहानी शुरू करते हैं!
कहानी का परिचय -
पंचलाइट हिंदी साहित्य के मशहूर ग्रामीण गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित एक कहानी है। जिसके लेखक फणीश्वर नाथ रेणु है।
इस कहानी में गांव की शिक्षा, पिछड़ापन, जातिगत भेदभाव और पेट्रोमैक्स (जिस गांव वाले पंचलाइट या पंचलैट कहते हैं।) को लेकर लोगों के उत्साह को बहुत ही सुंदर और हास्य पूर्ण तरीके से दिखाया गया है। कहानी यह संदेश देती है कि जब गांव या समाज के सामने कोई जरूरत या संकट आता है तो पुरानी दुश्मनी, नियम, कानून और जात पात सब किनारे हो जाता है।
महतो टोले द्वारा पंचलाइट खरीदना -
गांव में अलग-अलग जातियों के अपने-अपने मोहल्ले थे। ऐसा ही एक मोहल्ला था - महतो टोला। महतो टोले के लोग काफी सीधे-साधे और अनपढ़ थे।
पिछले 15 दिनों से महतो टोले के पंच (गांव के बड़े बुजुर्ग) गांव के अदालती जमाने के पैसे जमा कर रहे थे। जब पैसे जमा हो गए तो इस बार रामनवमी के मेले में महतो टोले के पंचों ने गांव के भले के लिए एक पंचलाइट (गैस की लालटेन) खरीदी। पंचलाइट के साथ-साथ उन्होंने पूजा पाठ का सामान भी खरीद, ताकि नई चीज घर आई है तो पहले भगवान की पूजा होगी और फिर उसे जलाया जाएगा।
पंचलाइट आने से पूरे महतो टोले में खुशी का माहौल बन गया। छोटे, बड़े, बच्चे, बूढ़े सब बहुत खुश थे। गांव वालों को लग रहा था कि अब उनके टोले में भी रोशनी होगी और उन्हें दूसरे टोले के आगे नीचा नहीं देखना पड़ेगा।
टोले में खुशी और पूजा की तैयारी -
मेले में पंचलाइट लेकर जब सरदार, दीवान और पंच गांव पहुंचे, तो पूरे टोले के लोग उन्हें देखने के लिए इकट्ठा हो गए। बच्चों में तो इतना उत्साह था कि वह ढोलक और मंजीरे बजने लगे।
टोले के सरदार ने अपनी पत्नी से कहा कि शाम को पंचलाइट जलाने से पहले पूजा पाठ होगा, इसलिए मैं जल्दी से पूजा की तैयारी कर ले। गांव की ‘गुलरी काकी’ ने भगवान के भजन गाने वाले मंडली के लोगों को इकट्ठा किया और कहा कि आज रात पंचलाइट की रोशनी में ही भजन कीर्तन होगा।
गांव के लोग बहुत गर्व महसूस कर रहे थे कि उनके टोले की अपनी पंचलाइट आ गई है। सब पंचलाइट के इर्द-गिर्द खड़े होकर उसकी तारीफ कर रहे थे।
असली समस्या: पंचलाइट जलाएगा कौन?
पूजा का सामान सज चुका था, कीर्तन गाने वाले लोग ढोलक लेकर बैठ चुके थे और पूरे टोले के लोग पंचलाइट के जलने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन ठीक उसी समय एक बहुत बड़ी समस्या सामने आ गई!
समस्या यह थी की पंचलाइन को जलाएगा कौन? महतो टोले के किसी भी इंसान को पेट्रोमैक्स जालना आता ही नहीं था। पंचलाइट खरीदते समय पंचों ने जोश-जोश में खरीद तो लिया लेकिन दुकानदार से यह पूछना भूल गए कि इस जलाया कैसे जाता है?
अब महतो टोले के लोगों की खुशी पल भर में उदासी में बदल गई। अगर वह किसी दूसरे टोले के आदमी को बुलाकर पंचलाइट जलवाते तो दूसरे टोले के लोग जिंदगी भर उनका मजाक उड़ाते और ताने मारते की अपनी पंचलाइट भी खुद नहीं जला पाते। इज्जत का सवाल बन गया था पंचों का मुंह उतर गया और पूरा महतो टोला उदासी के अंधेरे में डूब गया।
गोधन और मुनरी की प्रेम कहानी -
अब कहानी में मोड़ आता है। इसी महतो टोले में गोधन नाम का एक होशियार नवयुवक रहता था।
गोधन गांव की एक लड़की मुनरी से प्यार करता था। गोधन जब भी मुनरी के घर के सामने से गुजरता तो सिनेमा का गाना - सलीम अनारकली वाला गाना गुनगुनाने लगता था। मुनरी की मां गुलरी काकी को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई। उन्होंने गांव के पंचों से गोधन की शिकायत कर दी थी।
पंचों ने गोधन पर जुर्माना लगाया था और जब गोधन ने जुर्माना नहीं भरा, तो पंचों ने उसका हुका पानी बंद कर दिया था। गोधन से टोले का कोई भी व्यक्ति बातचीत नहीं करता था, लेकिन गोधन को पेट्रोमैक्स यानी पंचलाइट जलाना बहुत अच्छे से आता था। यह बात केवल उसकी प्रेमिका मुनरी को ही पता था।
इज्जत बचाने के लिए गोधन को बुलाना -
जब चारों तरफ सन्नाटा छाया था और महतो टोले की इज्जत दांव पर लगी थी तब मुनरी ने बड़ी चतुराई से अपनी सहेली कनेली के कान में फुसफुसाकर बताया कि गोधन को पंचलाइट जलाना आता है।
कनेली ने यह बात तुरंत सरदार और पंचों को बता दी। अब पंचों के सामने बड़ा धर्म संकट खड़ा हो गया:
- एक तरफ टोले का नियम था की जाति से बाहर किए गए इंसान से काम नहीं लेना है।
- दूसरी तरफ टोले की इज्जत का सवाल था कि अगर आज पंचलाइट नहीं जली तो गांव भर में हंसी होगी।
- आखिरकार सरदार और पंचों ने फैसला किया कि टोले की इज्जत बचाने के लिए गोधन का हुक्का पानी चालू करना ही पड़ेगा। सरदार ने चौकीदार को बुलाया और कहा कि गोधन को बुलाकर लाओ, लेकिन गोधन ने आने से मना कर दिया। उसने कहा अगर पंचलाइट जलाते समय कुछ गड़बड़ हो गई तो पंच उल्टे मुझे ही दोषी ठहराएंगे।
- इसके बाद गुलरी काकी खुद गोधन के घर गई उन्होंने गोधन को प्यार से समझाया और मनाकर अपने साथ ले आई।
पंचलाइट का जलना और गांव में खुशी की लहर -
अब फिर से परेशान हो गए क्योंकि तेल तो कोई लाया ही नहीं था! लेकिन गोधन बहुत समझदार था उसने कहा कि तेल की जरूरत नहीं है। वह गरीबदास के नारियल के तेल से ही पंचलाइट जला देगा।
गोधन ने पंचलाइट में पंप भरना शुरू किया। धीरे-धीरे पंचलाइट के शीशे में हल्की रोशनी आने लगी उसने फूंक मारा और गरी के तेल की मदद से पंचलाइट को जला दिया।
जैसे ही पंचलाइट जली और उसकी तेज सफेद रोशनी पूरे टोले में फैली महतो टोले के सभी लोगों का दिल खुशी से झूम उठा सबकी उदासी दूर हो गई कीर्तन करने वाली मंडली ने जोर से जयकारा लगाया - महावीर स्वामी की जय! और ढोलक मंजीरे बजने शुरू हो गए।
गोधन ने अपनी समझदारी से पूरे महतो टोले की इज्जत बचा ली थी। जो लोग अब तक गोधन को नफरत की नजर से देख रहे थे वह सब उसकी तारीफ करने लगे।
गोधन का अपराध माफ और कहानी का अंत -
- पंचलाइट जलने के बाद गांव के पंचों और सरदार का दिल गोधन के प्रति बदल गया।
- सरदार ने गोधन को बहुत प्यार से अपने पास बुलाया और उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा - तुम्हारे सब गुनाह माफ! तुमने हमारे टोले की इज्जत बचा ली। अब तुम खूब सिनेमा का गाना गाओ, तुम्हें कोई नहीं रोकेगा।
- गुलरी काकी (जिन्होंने गोधन की शिकायत की थी) भी बहुत खुश हुई। उन्होंने गोधन को शाम के खाने पर अपने घर बुलाया।
- मुनरी ने भी हंसती हुई नजरों से गोधन की तरफ देखा और दोनों की आंखें मिली। गोधन का हुक्का पानी फिर से शुरू हो गया और पूरे महतो टोले में पंचलाइट की रोशनी में देर रात तक नाच गाना और कीर्तन होता रहा।
पंचलाइट कहानी का मुख्य उद्देश्य -
इस आसन कहानी से हमें दो बहुत मुख्य बातें सीखने को मिलती हैं:
- जरूर नियम से बड़ी होती है - समाज या गांव के नियम और कायदे इंसानों की भलाई के लिए बनते हैं। जब कोई संकट या आवश्यकता आती है तो रूढ़िवादी नियमों को तोड़कर इंसानियत और आपसी एकता को चुनना ही बुद्धिमानी है।
- सच्ची समझदारी का सम्मान - गोधन का भले ही हुक्का पानी बंद कर दिया गया था, लेकिन उसकी समझदारी ने पूरे टोले का सिर ऊंचा कर दिया। हुनर और काबिलियत की कदर हर हाल में होती है और हमेशा होती रहेगी।
निष्कर्ष -
संक्षेप में कहा जाए तो पंचलाइट गांव के जीवन की एक बहुत ही जीवंत, सीधी-सादी और मनोरंजक कहानी है। लेखक फणीश्वर नाथ रेणु जी ने बहुत ही सरल तरीके से दिखाया है कि कैसे एक छोटी सी लालटेन पूरे गांव के लोगों को एक साथ ला देती है और आपकी मनमुटाव को खत्म कर देती है।
- यह कहानी हमें सिखाती है की छोटी-छोटी बातों पर आपसी भेदभाव भूलकर हमेशा एकता और प्यार से रहना चाहिए।
- उम्मीद है कि आपको पूंजी लाइट कहानी का यह सारण बहुत ही आसानी से समझ आ गया होगा। अब आप इसे अपनी परीक्षा में बिना किसी डर के बहुत ही सुंदर तरीके से लिख सकते हैं!
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